27 जन॰ 2017

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method of making gold, सोना बनाने की विधि




 method of making gold, 

सोना बनाने की विधि

हमारे पूर्वज पारा( मरकरी)से सोना बनाना जानते थे।

पारे को शिव का वीर्य कहा गया है।। शिव का तेज कहा गया है। पारे से सोना बनाया जा सकता है।।

इस विधि की खोज सबसे पहले महापंडित रावन ने की थी जो शिव का भक्त था।।और रावण ने आर्यों को भी ये विद्या सिखाई थी।।क्योंकि बहुत से आर्य रावण को अपना गुरु मानते थे।।

उसके बाद ये विद्या लुप्त हो गयी।

कलयुग में इसी विद्या को फिर से नागार्जुन ने जन्म दिया।। नागार्जुन एक ब्राह्मण था जिसने बाद में बुद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था और भगवान् बुद्ध का शिष्य बन गया था।।

नागार्जुन को भारत का आइंस्टीन भी कहा जाता है।। इसी नागार्जुन ने एक ग्रन्थ भी लिखा था जिसमे उसने पारे से सोना बनाने की पूरी विधि का वर्णन किया था। लेकिन वो ग्रन्थ आज किसके े पास है ये एक रहश्य है।।

रस मार्तंड नाम के ग्रन्थ में पारे से सोना बनाने की पूरी विधि का वर्णन मिलता है।। क्युकी मार्तंड शिव का ही एक नाम है इसलिये इसका नाम रस मार्तंड रक्खा गया।। ये ग्रन्थ आज भी जीवित है।

1935 में महात्मा गाँधी जब कोलकत्ता गए तबवहा के एक बंगाली तांत्रिक ने पारे से सोना बनाकर महात्मा गाँधी को 3 किलो सोना उपहार में दिया था।। महात्मा गाँधी ये चमत्कार देखकर दंग रह गए थे।

इसीलिए पारे की शिवलिंग की पूजा का सबसे अधिक महत्व है ।। क्युकी ये पारा महादेव का तेज है।।।

भारत के ब्राह्मण दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिक थे ।चाहे वो रावण हो या नागार्जुन।।।

यहाँ ब्राह्मण का मतलब जाती से नहीं है बल्कि कर्म से है।।

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