10 अप्रैल 2017

loading...

सिर्फ महिलाओं के लिए, Only for women


महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कई सारी जानकारी इंटरनेट पर और किताबों, पुस्तिकाओं के रूप में उपलब्ध है।
इस पेज पर भी इस से पहले हमने महिलाओं के स्वास्थ्य के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर ग़ौर करने का प्रयास किया है।

आइए, आज एक और अहम पहलू के बारे में सोचते हैं। महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य की बात करते हैं।
मानसिक रूप से स्वस्थ होने का मतलब और उद्देश्य सिर्फ़ यह नहीं है कि किसी बड़ी मानसिक बीमारी से पीड़ित न होना।

मानसिक स्वास्थ्य के रोज़मर्रा की दिनचर्या में कई परिमाण हैं जैसे, अपनी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं पर क़ाबू होना, निकटवर्तियों के साथ अच्छे भावनिक सम्बंध होना, 


सोच सकारात्मक होना,
अपनी शारीरिक क्षमता और बुद्धिमत्ता को पूरी तरह से उपयोग में लाने की इच्छा और उम्मीद के साथ चलते रहना। छोटी मोटी समस्याओं से निपटने की हिम्मत रखना। हम यह मानते हैं कि पुरुषों को भी रोज़मर्रा के तनावों का सामना करते रहना पड़ता है। 

लेकिन महिलाओं को अक्सर कई अलग अलग तरह की जिम्मेदारियाँ एक साथ उठानी पड़ती हैं; जैसे बच्चों के स्कूल में टीचर से मुलाक़ात करना, ऑफ़िस में प्रेज़ेंटेशन देना और अपने पारिवारिक रिश्ते, त्योहार, मेहमानों की देखभाल आदि निभाना।

हर महिला यह चाहती हैं कि वे अपने कामकाज की जगह अपने पुरुष सहकर्मियों के जितना ही अच्छा योगदान दे; और साथ साथ एक अच्छी होम मेकर, अच्छी माँ, अच्छी पत्नी, अच्छी बेटी तथा अच्छी बहु बनी रहे।

अपनी हर ज़िम्मेदारी को बख़ूबी निभाकर ख़ुद को एक 'सूपर वुमन' साबित करने की इस दौड़ में महिलाओं में मानसिक तनाव बनते और बढ़ते जाता है। 

हम सब यह समझ सकते हैं कि घर और ऑफ़िस दोनों जगहों पर आदर्श या पर्फ़ेक्ट योगदान देना कितना मुश्किल है! ज़ाहिर है कि जो महिलाएँ सूपर वुमन बनना चाहती हैं वे हर भूमिका पर्फ़ेक्ट तरीक़े से नहीं निभा पातीं और इसलिए अक्सर काफ़ी अपराधी महसूस करती रहती हैं। इस मानसिक तनाव का असर धीरे धीरे उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। 

तो फिर काम और निजी ज़िंदगी का तालमेल कैसे लगाया जाए?
सबसे अहम बात यह है कि अपना ख़याल रखें। अपना आहार नियमित और संतुलित रहे और रोज़ाना कोई शारीरिक कसरत मिले इस उद्देश्य से अपने दिनक्रम में छोटे छोटे बदलाव करना शुरू करें। 
ख़ुद के लिए नाश्ता तथा रात के खाने का समय निर्धारित करें। 

अगर आपको किसी विशिष्ट व्यक्ति या परिस्थिति के रहते तनाव महसूस होता हो या अपने ध्येय पर ध्यान देने में कठिनाई होती हो तो उसे पहचानें। 

हर काम पर्फ़ेक्ट करने की अपेक्षा ख़ुद से न करें।
यह निश्चित करें कि कौन सी जिम्मेदारियाँ आपके लिए सबसे अहम हैं। अपनी क्षमताएँ उन ज़िम्मेदारियों पर केंद्रित करें। पति तथा घर के अन्य सक्षम सदस्यों के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियाँ बाँट लें।

अपने लिए एक टाइम टेबल बनाएँ।
रोज़मर्रा के महत्वपूर्ण कामों के लिए समय निर्धारित करने से अस्तव्यस्तता काफ़ी हद तक कम की जा सकती है। अगर आप मानसिक रूप से परेशान हैं तो उसके बारे में अपने निकटवर्तियों से बात करें और उनके सहयोग से हल ढूँढने का प्रयास करें। 

अगर आप हफ़्ते में कुछ समय किसी ऐसे काम में बिताना चाहती हैं जो करने से आपको ख़ुशी मिलती हैं तो ज़रूर ऐसा करें। अगर आपको जिम में जाना, टहलना, किताब पढ़ना या मेडिटेशन करना अच्छा लगता है तो उसके लिए समय ज़रूर निकालें।याद रहें, ख़ुद का ख़याल रखना ख़ुदगर्ज़ी नहीं है। अगर आप ख़ुद स्वस्थ और ख़ुश हैं, तो ही दूसरों का ख़याल रख सकेंगीं। 

हम अक्सर उन विषयों के बारे में सोचकर चिंतित होते हैं जिन पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं। 
अगर हमारी सोच सकारात्मक और सही मुद्दों पर केंद्रित हो, तो ही हम ख़ुश और प्रगतिशील रह पाएँगें। 

अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति की पत्नी एलिनॉर रूज़वेल्ट कहती हैं, आपकी अनुमति के बग़ैर आपको कोई दुखी नहीं कर सकता"! 

दोस्तों, आपसी बातचीत और कोशिश के बावजूद अगर तनावों से राहत न मिले तो किसी नज़दीकी क्लीनिक में साइकोलॉजिस्ट (काउन्सेलर) की मदद ली जा सकती है।
loading...