3 जून 2017

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क्यों हो रहे हैं आजकल के विवाह असफल Why are nowadays marriage fail


कई दिनों से यह देखने मे आ रहा हैं की आजकल लगभग विवाह के पूर्व लड़का - लड़की की कुंडली का मिलान करवाते हैं । अच्छे गुण मिल जाते हैं, विवाह सम्पन्न भी हो जाता हैं। पर कुछ दिनो बाद विवाह, विवाद मे बदल जाता हैं । वैसे तो विवाह के विवाद मै बदलने के कई कारण हैं पर कुछ ख़ास कारण जो मूल जड़ होती हैं उस पर किसी का ध्यान नही जाता ।

पहला कारण जब हम विवाह की पत्रिका छापते हैं तो पहली पत्रिका हम अपने इष्ट देव या श्री गणेश जी या कुल देव को अर्पित कर आमन्त्रण देते हैं, विवाह सम्पूर्ण हो जाता हैं , लेकिन विवाह पश्चात कभी भी हमने उनके पास जाकर विवाह सुखद सम्पन्न होने का धन्यवाद नही देते । हम शादी के बाद इतने व्यस्त हो जाते की जिनको हमने निमन्त्रण देकर बुलाया उनको सम्मान सहित वापस भी तो भेजना होगा । यंही गलती होती हैं । ईश्वर को यदि हम बुला रहे हैं तो ससम्मान विसर्जन या भेजना भी होगा । होता यूं हैं की बुला तो लिए लेते हैं और फिर बुलाकर काम निकालकर भूल जाते हैं । 

अक्सर परिवार मैं उनके कुल देव , कुल देवी को विवाह का निमंत्रण नही देते, साथ ही विवाह पश्चात वर वधु घूमने चले जाते है, जबकि विवाह पश्चात सबसे पहले कुल देव, कुल देवी के दर्शन (जाता देना) हेतु जाना चाहिये । क्योंकि आप का कुल उनके आशीर्वाद से ही आगे बढ़ेगा ।

तीसरा कारण जब विवाह का मुहूर्त निकलता हैं तो जब ख़ास फेरे का मुहूर्त होता हैं, पण्डित एक ख़ास मुहूर्त निकालता हैं, मुहूर्त के समय दूल्हे के दोस्त नाच, गाना, मस्ती करते रहते हैं, बारात प्रवेश होने तक सब शुभ समय खत्म हो जाता हैं । अब जो समय शुभ मुहूर्त का था अशुभ समय का हो जाता हैं । कभी कभी राहु काल, यमगण्ड काल, अशुभ,काल,उद्बेग आदि चौघडिये मे भी फेरे हो जाते हैं । अब आप ही सोचे की क्या भारी बारिश मे आप चौराहे पर कभी खुले मे दीपक जलायेगे तो क्या दीपक टिक पायेगा । इसी तरह जब अशुभ मुहूर्त या योग या चौघडिये मै जब आप विवाह करेगे तो क्या विवाह टिक पायेगा ।

कई लोग पत्रिका मिलाते हैं, पर गुण नही मिलने की स्थिति मैं नाम से गुण मिलाकर या नाम बदलकर विवाह कर लेते हैं। ये भी एक गलती हैं ।

एक गलती और होती है, कई लोग तो विवाह वर्तमान याने चालू नाम से नहीं मिलने पर जन्म नाम से मिलाकर विवाह करते पर उपयोग मैं चालू नाम ही रखते । 

अक्सर विवाह मे मंगल दोष को देखा जाता है, पर इसके साथ ही लड़के की कुंडली मैं सूर्य और शुक्र दोष को भी औऱ कन्या की कुंडली मैं गुरु, चंद्र दोष को भी देखा जाना जरूरी हैं ।

मेने अनुभव मैं पाया कि जब जब भी किसी लड़के की कुंडली मैं सूर्य राहू , राहू शुक्र यदि नकारात्मक स्थिति मे हो, अथवा लड़की की कुंडली मैं गुरु राहू नकारात्मक हो तो समस्या जरूर आती है ।

एक कारण यह भी देखने मे आया है कि लोग मनपसंद विवाह स्थान (होटल, गार्डन, रिसोर्ट) पाने के लिए विवाह का मुहूर्त 6-8 महिने या उससे भी पहले निकाल तो लेते है पर जब फोरो मे बैठने का समय आता है तो पंडित जी से कहते है, पंडित जी आप दिपक लगा दीजिये । याद रहे कोई भी शुभ कार्य दिपक को प्रज्वलित कर देने मात्र से प्रारंभ नही माना जाता बल्कि उस कार्य का प्रधान संकल्प लेने से ही मान्य होता है। 

देखिये हम इस विषय पर कई तर्क वितर्क कर सकते हैं, की जो लोग बिना मुहूर्त निकाले करते हैं उनकी शादी भी तो बरसो तक टिकी रहती हैं,,या अधिकतर समाज इस मुहूर्त परम्परा को नही मानता । पर ये मेरी सोच हैं जब हम कुंडली से शुरुवात करते हैं तो कोई भी शुभ कार्य की शुरुवात भी शुभ मुहूर्त से ही करे ।
विवाह के फेरे स्थिर लग्न मे, शुभ चौघड़िया और शुभ तिथि मै यदि कराये जाए तो विवाह कभी विवाद मे नही पहुंचता ।
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